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घुमक्कड़ आगन्तुक राम :: व्यक्तित्व
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शनिवार, 26 फ़रवरी 2011
दस्तूर-ए-नज़्म
तेरे शहर-ए-वफ़ा के लोगों ने पहले प्यार किया,फिर छोड़ दिया...!!
मुझे सागर समझ के पीते थे...जब प्यास बुझी तब तोड़ दिया !!
1 टिप्पणी:
बेनामी ने कहा…
तेरे शहर ......तब तोड़ दिया
बहुत सुंदर
28 फ़रवरी 2011 को 11:47 am बजे
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1 टिप्पणी:
तेरे शहर ......तब तोड़ दिया
बहुत सुंदर
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