गुरुवार, 31 मार्च 2011

कितने अज़ीब हो तुम ...अज़ीज़ !!!





क्या शीरत है तेरी अज़ीब !!! 
जब जब नजारों में तूने कोई तस्वीर पायी...
बस कैद कर ली वो सूरत 
और कहा... तू ही है मेरा अज़ीज़ !!!



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