तेरे शौक़ की बात इतनी हुई कि दुनिया मुझे शौक़ीन कहती है
तुझसे मिली इतनी शराब कि जिसे पीकर चलूँ तो वो मुझे शराबी कहती है
पर बात मुझको खटकती है तो आखिर कौन हूँ मैं..? जिसे तू बीमार कहती है
मैंने तो हर घूँट पीया है तेरी साक़ी का ईमान से, फिर क्यूँ तू मुझको बेईमान कहती है
तुझको पा सकूँ हर जगह इसीलिए समीर बन बहता हूँ मैं
होठों का तेरे स्पर्श है प्रिय मुझको, सो लालिमा बन हर वक़्त लिपटा हूँ मैं
उजाले में मेरी सूरत सबको खटकती है, पर मिलना ही बस तुझसे चाहूँ मैं
क्या करूँ चला आता हूँ रात के आगोश में, तो दुनिया मुझको चोर कहती है
तेरे शौक़ की बात इतनी हुई कि दुनिया मुझे शौक़ीन कहती है
तेरी नज़दीकी की खातिर लिबास तेरे साये का बन गया मैं तो
एहसास ने मुझको सताया तो तेरी धडकनों में बस गया मैं तो
तूने दिल में दी थोड़ी जगह तो दिमाग में भी कुछ रम गया मैं तो
पहले मेरे दस्तख़त को पूजा 'राम' , फिर कवि भी कहती है...
इल्म कर बताया तुझको को तो ये दीवाना-पागल भी कहती है
तेरे शौक़ की बात इतनी हुई कि दुनिया मुझे शौक़ीन कहती है
तेरे शौक़ की बात इतनी हुई कि दुनिया मुझे शौक़ीन कहती है
तुझसे मिली इतनी शराब कि जिसे पीकर चलूँ तो वो मुझे शराबी कहती है
पर बात मुझको खटकती है तो आखिर कौन हूँ मैं..?? जिसे तू बीमार कहती है
मैंने तो हर घूँट पीया है तेरी साक़ी का ईमान से, फिर क्यूँ तू मुझको बेईमान कहती है
तुझसे मिली इतनी शराब कि जिसे पीकर चलूँ तो वो मुझे शराबी कहती है
पर बात मुझको खटकती है तो आखिर कौन हूँ मैं..? जिसे तू बीमार कहती है
मैंने तो हर घूँट पीया है तेरी साक़ी का ईमान से, फिर क्यूँ तू मुझको बेईमान कहती है
तुझको पा सकूँ हर जगह इसीलिए समीर बन बहता हूँ मैं
होठों का तेरे स्पर्श है प्रिय मुझको, सो लालिमा बन हर वक़्त लिपटा हूँ मैं
उजाले में मेरी सूरत सबको खटकती है, पर मिलना ही बस तुझसे चाहूँ मैं
क्या करूँ चला आता हूँ रात के आगोश में, तो दुनिया मुझको चोर कहती है
तेरे शौक़ की बात इतनी हुई कि दुनिया मुझे शौक़ीन कहती है
तेरी नज़दीकी की खातिर लिबास तेरे साये का बन गया मैं तो
एहसास ने मुझको सताया तो तेरी धडकनों में बस गया मैं तो
तूने दिल में दी थोड़ी जगह तो दिमाग में भी कुछ रम गया मैं तो
पहले मेरे दस्तख़त को पूजा 'राम' , फिर कवि भी कहती है...
इल्म कर बताया तुझको को तो ये दीवाना-पागल भी कहती है
तेरे शौक़ की बात इतनी हुई कि दुनिया मुझे शौक़ीन कहती है
तेरे शौक़ की बात इतनी हुई कि दुनिया मुझे शौक़ीन कहती है
तुझसे मिली इतनी शराब कि जिसे पीकर चलूँ तो वो मुझे शराबी कहती है
पर बात मुझको खटकती है तो आखिर कौन हूँ मैं..?? जिसे तू बीमार कहती है
मैंने तो हर घूँट पीया है तेरी साक़ी का ईमान से, फिर क्यूँ तू मुझको बेईमान कहती है
1 टिप्पणी:
bhavpoorna prastuti ke lie aapka abhar.
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